शिव महिम्न स्तोत्र

शिव महिम्न स्तोत्र   श्री शिवशंकरांचा परम भक्त पुष्पदंत गंधर्व याने रचलेले हे स्तोत्र , शंकराला अत्यंत प्रिय असून जो कोणी हे स्तोत्र म्हणतो त्याला रुद्रपाठ केल्याचे फळ मिळते अशी धारणा आहे . आजही अनेक ठिकाणी या स्तोत्रानेच श्रीमहादेवाला अभिषेक

शिव कवच , शिव रक्षा स्तोत्र

॥ श्रीशिवरक्षास्तोत्रम् ॥ शिव रक्षा स्तोत्र वाचल्या मुळे रोग , बाधा , पीड़ा होत नाही तसेच अपघटना , गंडान्तर संकट याचा नाश होऊन वाचकाला दीर्घायुष्य व सुदृढ़ कांती आरोग्य प्राप्त होऊन भगवान श्री शिव शंकरांचा आशीर्वाद प्राप्त होतो .. श्री

श्रीलङ्केश्वरविरचिता शिवस्तुतिः

हे स्तोत्र म्हणून श्री शिवशंकराची कृपा दृष्टी प्राप्त होते .. श्रीलङ्केश्वरविरचिता शिवस्तुतिः गले कलितकालिम प्रकटितेन्दु भालस्थले विनाटितजटोत्करं रुचिरपाणिपाथोरुहे । उदञ्चितकपालकं जघनसीम्नि संदर्शित- द्विपाजिनमनुक्षणं किमपि धाम वन्दामहे ॥ १ ॥ वृषोपरिपरिस्फुरद्धवलधाम धामश्रिया कुबेरगिरिगौरिमप्रभवगर्वनिर्वासि तत्‌ । रुचिरपुनरुमाकुचोपचितकुङ्कुमै रञ्जितं गजाजिनविराजितं वृजिनभङ्गबीजं भजे ॥

श्री महामृत्युञ्जय स्तोत्र

श्री शिवशंकराची कृपा दृष्टी होऊन उत्तम आरोग्य , सुदृढ कांती प्राप्त होण्यासाठी तसेच अपघटना , गंडांतर , अरिष्ट , शारीरिक त्रास महाव्याधी वैगेरे चा त्रास होऊ नये या साठी हे स्तोत्र म्हणावे . श्री महामृत्युञ्जय स्तोत्र श्रीगणेशाय नमः ॥ ॐ

लिङ्गाष्टकम्

लिङ्गाष्टकम् ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गम् निर्मलभासितशोभितलिङ्गम् जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गम् तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्  १   देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गम् कामदहम् करुणाकर लिङ्गम् रावणदर्पविनाशनलिङ्गम् तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्  २   सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गम् बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम् सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गम् तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्  ३   कनकमहामणिभूषितलिङ्गम् फनिपतिवेष्टित शोभित लिङ्गम् दक्षसुयज्ञ विनाशन लिङ्गम् तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्  ४   कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गम् पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम् सञ्चितपापविनाशनलिङ्गम्

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