देवी भजन स्तुती

भजन - स्तुती Posted at 2018-10-18 08:35:58
देवी भजन स्तुती || जय जय रेणुके || ( चाल - लो लो लागला ) जय जय रेणुके | श्रीमाते | माहुरगडी वसते | भक्ता देईतु | मुक्ति हो | मूळपीठ नायिके || धृ. || उंच बसलीस | डोंगरी अरण्या भीतरी | हिंस्र पशूंच्यां | हो राणी | पावे मज निर्वाणी || धृ.१ || डोंगर पायथी | तलाव.. | मातृका नामे थोर | जन येती हो | स्नानांसी | पावती मनोरथासी | ऐसी तव लीला | अहो बाई | दर्शन दे ग आई || धृ.२|| दत्त नामे हो शिखर | अनुसया डोंगर | भद्रकाली ती समोर | नांदे परशुराम | भक्ता करितसे | पावन | लागो तुझे ध्यान || धृ.३ || तीर्थे असती | एकशे आठ | सर्वहि बहुश्रेष्ठ | सर्वहि तीर्थेहो | पवित्र | मना आनंद देत | तेथे पाहूनिया | ती शोभा हरी तन्मय उभा || धृ.४ || ------ ------- --------- ------- -------- ------- || आली भावनीभक्तासाठी || आली भवानी भक्तासाठी | दरबारी धावत || २ || पायी घागऱ्या रुणुझुणुवाजती | आनंदे डोलत || धृ || अष्टभुजा नारायणी | लाल शालू हा नेसोनी सिंहावरी स्वार होऊनी | झणझणकार करीत || १ || किरीट कुंडल कुरळे केस | भाळी मळवट बिंदी घोस | मुखी तांबूल रंगला खास | विकट हास्य जोरात || २ || शक्ती चक्र गदा घेऊनी | खङग परीघ हाती असोनी | वरद हस्ते उभी भवानी | शंख वाजवी जोरात || ३ || सर्व भक्ता दर्शन देऊनी | संकटे त्यांचीे सर्व हरोनी | दशदिशा अवलोकुनी | हरी शरण अंबेसी || ४ || ------ -------- ---------- --------- सदा आनंदभरित । रंग साहित्य संगीत ॥१॥ जगन्माता जगदीश्वरी । जगज्योति जगदोद्धारी ॥२॥ जिच्या वैभवाचे लोक । हरिहर ब्रम्हादिक ॥३॥ बहु राजे राजेश्वर । सर्व तुझेचि किंकर ॥४॥ वसे आकाशीं पाताळीं । सर्वकाळीं तिन्हीताळीं ॥५॥ सर्व देह हालविते । चालविते बोलविते ॥६॥ मूळमाया विस्तारली । सिद्धसाधकांची बोली ॥७॥ शक्ति सर्वांगें व्यापिली । शक्ति गेली काया मेली ॥८॥ होते कोठून उत्पात्ति । भगवती भगवति ॥९॥ सुख तीवांचूनि नाहीं । नलगे अनुमान कांहीं ॥१०॥ जाली माता मायराणी । भोग नाहीं तीवांचूनी ॥११॥ भूमंडळींच्या वनिता । बाळ तारुण्य समस्तां ॥१२॥ जगजीवनी मनमोहनी । जिवलगचि त्रिभुवनीं ॥१३॥ रुप एकाहुनी एक । रम्य लावण्यनाटक ॥१४॥ पहा एकचि अवयव । भुलविले सकळ जीव ॥१५॥ मन नयन चालवी । भगवती जग हालवी ॥१६॥ भोग देते भूमंडळीं । परि आपण वेगळी ॥१७॥ योगी मुनिजन ध्यानीं । सर्व लागले चिंतनीं ॥१८॥ भक्ति मुक्ति युक्ति दाती । आदिशक्ति सहज स्थिति ॥१९॥ सतरावी जीवनकळा । सर्व जीवांचा जिव्हाळा ॥२०॥ मुळीं रामवरदायिनी । रामदास ध्यातो मनीं ॥२१॥ -------- --------- ---------- ------------ -------------- अनंत युगाची जननी । तुळजा रामवरदायिनी । तिचें स्वरुप उमजोनी । समजोनि राहे तो ज्ञाता ॥ध्रु०॥ शक्तिविणें कोण आहे । हें तों विचारुनि पाहे । शक्तिविरहित न राहे । यशकीर्ति प्रताप ॥१॥ शिवशक्तीचा विचार । अर्धनारी नटेश्वर । दास म्हणे हा विस्तार । तत्त्वज्ञानी जाणती ॥२॥ --------- ----------- ----------- --------- --------- जगदंबा जगदेश्वरी । श्रीराम अयोध्याविहारी । भक्तजनांसी उद्धरी । पार करी भवासी ॥१॥ शिवशक्तीचा विचार । साधु जाणती सारासार । अंतरीं स्मरावा रघुवीर । एका भावें करुनी ॥२॥ देव देवी अवघा एक । याचा करावा विवेक । नदी नद्या पुण्यदायक । सागरीं उदक एकचि ॥३॥ दास म्हणे सत्य वचन । एकचि देवी रघुनंदन । अवघा व्यापक आपण । साधुसंत जाणती ॥४॥ --------- - - ------------- ---------- ---------- - तुकाई यमाई नमूं चडाबाई । जाखाई जोखाई सटवाई ते ॥१॥ सटवाई जगदंबा आदिशक्ति अंबा । तुम्हीं त्या स्वयंभा दाखवावें ॥२॥ दाखवावें तुम्हीं सर्वां पैलीकडे । देखतांचि घडे मोक्षपद ॥३॥ मोक्षपद घडे मोक्षासी पहातां । तद्रूपचि होतां दास म्हणे ॥४॥ ------ -------- ----------- ----------- --------- -------- जय देवी दुर्गा गौरी शंकरी जय सर्वेश्वरी जय जगदीश्वरी । जय देवी दुर्गा गौरी शंकरी जय सर्वेश्वरी जय जगदीश्वरी ।। पार्वती भगवती हरिनारायणी महिषासुर मर्दिनि भवानी । विद्यादायिनी सुविमल कामिनि शाम्भवी शंकरी मोक्ष प्रदायिनी ।। जय देवी दुर्गा गौरी शंकरी जय सर्वेश्वरी जय जगदीश्वरी ।। श्रीकरी क्षेमकरी प्रलयंकरी आदिशक्ति जगजननी दया करि । भैरवी शारदे त्रिपुरसुन्दरि पाप विमोचनी श्री विश्वेश्वरी ।। जय देवी दुर्गा गौरी शंकरी जय सर्वेश्वरी जय जगदीश्वरी ।। कात्यायिनि श्री जगदोद्धारिणी नारायणी शिव शक्ति स्वरूपिणी । दुर्गा भवानी मंगलकारिणी सर्वेश्वरी सुन्दरी कृपालिनी ।। जय देवी दुर्गा गौरी शंकरी जय सर्वेश्वरी जय जगदीश्वरी ।। सत्यधर्मरूपिणी महेश्वरी भुवनेश्वरी अम्बा परमेश्वरी । महाकाली जय महालक्ष्मी जय महासरस्वती जय भुवनेश्वरी ।। जय देवी दुर्गा गौरी शंकरी जय सर्वेश्वरी जय जगदीश्वरी ।।

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